छोटा जादूगर (Chhota Jadugar) SEBA textbook पाठ के प्रश्न-उत्तर और अभ्यास हल
लेखक: जयशंकर प्रसाद
कक्षा: हिंदी (साहित्य)
जयशंकर प्रसाद जी द्वारा रचित कहानी ‘छोटा जादूगर’ एक अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी एक ऐसे बालक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी विषम परिस्थितियों, गरीबी और बीमार माँ की सेवा के लिए कम उम्र में ही स्वावलंबी और चतुर बन जाता है। यहाँ इस पाठ के सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत और सटीक उत्तर दिए गए हैं।

बोध एवं विचार
1. सही विकल्प का चयन करो:
(क) बाबू जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था?
उत्तर: (अ) काशी में ।
(ख) जयशंकर प्रसाद जी का साहित्यिक जीवन किस नाम से आरंभ हुआ था?
उत्तर: (आ) ‘कलाधर’ नाम से ।
(ग) प्रसाद जी का देहावसान हुआ ?
उत्तर: (इ) 1937 ई. में ।
(घ) कार्निवाल के मैदान में लड़का चुपचाप किनको देख रहा था?
उत्तर: (ई) शरबत पीने वालों को ।
(ङ) लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल अच्छा मालूम हुआ?
उत्तर: (अ) खिलौने पर निशाना लगाना। ।
—
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
(क) जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम क्या है?
उत्तर: जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम ‘ग्राम’ है।
(ख) प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य का नाम बताओ।
उत्तर: प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य का नाम ‘कामायनी’ है।
(ग) लड़का जादूगर को क्या समझता था?
उत्तर: लड़का जादूगर को ‘बिल्कुल निकम्मा’ समझता था।
(घ) लड़का तमाशा देखने परदे में क्यों नहीं गया था?
उत्तर: लड़का तमाशा देखने परदे में इसलिए नहीं गया क्योंकि वहाँ टिकट लगता था और उसके पास पैसे नहीं थे।
(ङ) श्रीमान ने कितने टिकट खरीद कर लड़के को दिए थे?
उत्तर: श्रीमान ने बारह टिकट खरीद कर लड़के को दिए थे।
(च) लड़के ने हिंडोले से अपना परिचय किस प्रकार दिया था?
उत्तर: लड़के ने हिंडोले से ‘छोटा जादूगर’ कहकर अपना परिचय दिया था।
(छ) बालक (छोटे जादूगर) को किसने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था?
उत्तर: बालक को ‘आवश्यकता’ ने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था।
(ज) श्रीमान कलकत्ते में किस अवसर की छुट्टी बिता रहे थे?
उत्तर: श्रीमान कलकत्ते में ‘बड़े दिन’ (क्रिसमस) की छुट्टी बिता रहे थे।
(झ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर खेल दिखाते समय छोटे जादूगर की वाणी में स्वभावसुलभ प्रसन्नता की तरी क्यों नहीं थी?
उत्तर: उसकी वाणी में प्रसन्नता इसलिए नहीं थी क्योंकि उसकी माँ की मृत्यु की घड़ी समीप थी।
(ञ) मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से कौन-सा अधूरा शब्द निकला था?
उत्तर: मृत्यु से ठीक पहले माँ के मुँह से “बे…” (बेटा) अधूरा शब्द निकला था।
—
3. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में):
(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता है?
उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय कवि, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में मिलता है। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभ थे।
(ख) श्रीमान ने छोटे जादूगर को पहली भेंट के दौरान किस रूप में देखा था?
उत्तर: श्रीमान ने उसे एक छोटे फव्वारे के पास देखा। उसके गले में फटे कुरते के ऊपर सूत की रस्सी थी और जेब में ताश के पत्ते थे।
(ग) “वहाँ जाकर क्या कीजिएगा?” छोटे जादूगर ने ऐसा कब कहा था?
उत्तर: जब श्रीमान (लेखक) ने उसे तमाशा देखने के लिए परदे के भीतर (जहाँ टिकट लगता था) चलने को कहा, तब छोटे जादूगर ने ऐसा कहा।
(घ) निशानेबाज के रूप में छोटे जादूगर की कार्य-कुशलता का वर्णन करो।
उत्तर: वह पक्का निशानेबाज था। उसने 12 टिकटों से 12 खिलौनों पर सटीक निशाना लगाया। उसका कोई भी निशाना खाली नहीं गया।
(ङ) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान-श्रीमती को छोटा जादूगर किस रूप में मिला था?
उत्तर: वहाँ वह साफ जाँघिया और आधी बाँहों का कुरता पहने था। सिर पर सूत की रस्सी से रूमाल बँधा था और हाथ में खादी का झोला था।
(च) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान ने जब छोटे जादूगर को ‘लड़के!’ कहकर संबोधित किया, तो उत्तर में उसने क्या कहा?
उत्तर: उसने कहा, “छोटा जादूगर कहिए। यही मेरा नाम है। इसी से मेरी जीविका है।”
(छ) “आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं?”- इस प्रश्न के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या कहा?
उत्तर: उसने अविचल भाव से कहा, “माँ ने कहा है कि आज तुरन्त चले आना। मेरी घड़ी समीप है।”
—
4. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में):
(सभी उत्तर ज्यों-का-त्यों रखे गए हैं — कोई परिवर्तन नहीं)
(क) प्रसाद जी की कहानियों की विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर: जयशंकर प्रसाद की कहानियों में भावनाओं की प्रधानता, कवित्वपूर्ण भाषा, ऐतिहासिकता और आदर्शोन्मुख यथार्थवाद (आदर्श और यथार्थ का मिश्रण) देखने को मिलता है। उनकी कहानियाँ पाठकों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।
(ख) “क्यों जी, तुमने इसमें क्या देखा?” इस प्रश्न का उत्तर छोटे जादूगर ने किस प्रकार दिया था?
उत्तर: उसने उत्तर दिया कि उसने सब देखा है। उसे खिलौने पर निशाना लगाना सबसे अच्छा लगा। उसने यह भी कहा कि वहाँ का जादूगर निकम्मा है, उससे अच्छा ताश का खेल तो वह स्वयं दिखा सकता है।
(ग) अपने माँ-बाप से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या-क्या कहा था?
उत्तर: उसने बताया कि उसके बाबूजी देश के लिए जेल में हैं, जिस पर उसे गर्व था। उसने यह भी बताया कि उसकी माँ बीमार है, इसलिए वह उनके लिए पैसे कमाने निकला है।
(घ) श्रीमान ने तेरह चौदह वर्ष के छोटे जादूगर को किसलिए आश्चर्य से देखा था?
उत्तर: श्रीमान ने देखा कि इतनी कम उम्र में वह लड़का अपनी बीमार माँ के इलाज और भोजन के लिए तमाशा दिखा रहा था। उसके चेहरे पर विषाद के साथ धैर्य और स्वाभिमान देखकर वे आश्चर्यचकित थे।
(ङ) श्रीमती के आग्रह पर छोटे जादूगर ने किस प्रकार अपना खेल दिखाया?
उत्तर: उसने कार्निवल के खिलौनों का अभिनय किया। भालू मनाने लगा, बिल्ली रूठने लगी, बंदर घुड़कने लगा, और गुड़िया का ब्याह हुआ। ताश के पत्ते लाल-काले हो गए और रस्सी के टुकड़े जुड़ गए।
(च) हवड़ा की ओर आते समय छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की भेंट किस प्रकार हुई थी?
उत्तर: श्रीमान ने रास्ते में छोटे जादूगर को एक झोंपड़ी के पास कम्बल कंधे पर डाले देखा। पूछने पर पता चला कि अस्पताल से निकाले जाने के बाद उसकी बीमार माँ उसी झोंपड़ी में थी।
(छ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर छोटा जादूगर किस मनःस्थिति में और किस प्रकार खेल दिखा रहा था?
उत्तर: वह अत्यंत दुखी मनःस्थिति में था। वह औरों को हँसाने की कोशिश कर रहा था, पर स्वयं भीतर से काँप रहा था। उसकी वाणी में प्रसन्नता नहीं थी, मानो उसके रोएँ रो रहे हों, क्योंकि माँ की मृत्यु निकट थी।
(ज) छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की अंतिम भेंट का अपने शब्दों में वर्णन करो।
उत्तर: जब श्रीमान छोटे जादूगर को लेकर झोंपड़ी में पहुँचे, तो जादूगर “माँ-माँ” पुकारता हुआ दौड़ा। माँ ने “बे…” कहा और उसके हाथ गिर गए। वह मर चुकी थी। जादूगर उससे लिपटकर रोने लगा और पूरा संसार जैसे स्तब्ध हो गया।
—
5. सम्यक उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):
(मूल उत्तर बिना किसी परिवर्तन के)
(क) बाबू जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक देन का उल्लेख करो।
उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के ‘छायावादी’ युग के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने महाकाव्य ‘कामायनी’ की रचना की जो खड़ी बोली का अद्वितीय ग्रंथ है। उन्होंने ‘आँसू’, ‘लहर’, ‘झरना’ जैसे काव्य, ‘चंद्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’, ‘ध्रुवस्वामिनी’ जैसे ऐतिहासिक नाटक, और ‘कंकाल’, ‘तितली’ जैसे उपन्यास लिखे। उनकी कहानियाँ जैसे ‘पुरस्कार’, ‘ममता’, ‘छोटा जादूगर’ भावनाओं और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत हैं। उन्होंने हिंदी भाषा को प्रांजल और समृद्ध बनाया।
(ख) छोटे जादूगर के मधुर व्यवहार एवं स्वाभिमान पर प्रकाश डालो।
उत्तर: छोटा जादूगर गरीबी में होते हुए भी स्वाभिमानी था। वह भीख नहीं माँगता था, बल्कि खेल दिखाकर पैसे कमाना चाहता था। जब लेखक ने उसे शरबत पिलाया, तो उसने कहा कि अगर वह उसका खेल देखकर पैसे देते तो उसे अधिक खुशी होती। उसकी बातों में प्रगल्भता और मधुरता थी। बोटानिकल गार्डन में भी उसने बहुत सलीके से बात की और अपना परिचय “छोटा जादूगर” के रूप में दिया, जो उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है।
(ग) छोटे जादूगर की चतुराई और कार्य-कुशलता का वर्णन करो।
उत्तर: आवश्यकता ने बालक को समय से पहले चतुर बना दिया था। वह निशानेबाजी में पक्का था और बारह के बारह खिलौने जीत लिए। जादू के खेल में भी वह माहिर था—ताश के पत्ते बदलना, रस्सी जोड़ना और खिलौनों का अभिनय कराना उसे बखूबी आता था। अपनी बातों और अभिनय से वह दर्शकों (जैसे श्रीमती) को मोहित कर लेता था। वह जानता था कि किस प्रकार अपनी जीविका चलानी है।
(घ) छोटे जादूगर के देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का परिचय दो।
उत्तर: छोटे जादूगर के अंदर कूट-कूट कर देश-प्रेम भरा था। जब वह बताता है कि उसके पिता जेल में हैं, तो गर्व से कहता है—”देश के लिए।” मातृ-भक्ति में वह एक आदर्श पुत्र था। वह अपनी बीमार माँ के इलाज (पथ्य) और भोजन के लिए ही तमाशा दिखाता था। अंतिम समय में माँ के बुलाने पर वह खेल छोड़कर तुरंत भागता है और माँ से लिपट जाता है।
(ङ) छोटे जादूगर की कहानी से तुम्हें कौन-सी प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने, स्वावलंबी बनने और परिश्रम करने की प्रेरणा मिलती है। यह हमें सिखाता है कि गरीबी में भी स्वाभिमान कैसे बनाए रखा जाता है। साथ ही, यह कहानी माता-पिता के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और त्याग की भावना भी जगाती है। हमें यह भी सीख मिलती है कि जीवन की कठिनाइयाँ मनुष्य को समय से पहले समझदार बना देती हैं।
—
6. सप्रसंग व्याख्या करो:
(मूल प्रसंग और व्याख्या बिना बदलाव के प्रस्तुत)
(क) “मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ। उसके अभाव में भी संपूर्णता थी।”
प्रसंग: यह पंक्तियाँ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी ‘छोटा जादूगर’ से ली गई हैं। लेखक कार्निवल के मैदान में उस लड़के (छोटे जादूगर) को पहली बार देखकर यह सोच रहे हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि वह लड़का गरीब था, फटे कपड़े पहने था (अभाव), लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब धैर्य और गंभीरता थी। वह किसी के आगे हाथ नहीं फैला रहा था, बल्कि शांत भाव से खड़ा था। उसके व्यक्तित्व में एक प्रकार का संतोष और आत्मविश्वास (संपूर्णता) था, जिसने लेखक को अनायास ही उसकी ओर खींच लिया।
(ख) “श्रीमती की वाणी में वह माँ की सी मिठास थी, जिसके सामने किसी भी लड़के को रोका नहीं जा सकता।”
प्रसंग: यह प्रसंग बोटानिकल उद्यान का है। जब छोटा जादूगर खेल दिखाने आया तो लेखक ने मना कर दिया, लेकिन उनकी पत्नी (श्रीमती) ने उसे खेल दिखाने को कहा।
व्याख्या: लेखक को गुस्सा आ रहा था, लेकिन जब उनकी पत्नी ने प्यार से लड़के को खेल दिखाने के लिए कहा, तो लेखक चुप रह गए। श्रीमती की आवाज़ में एक माँ जैसी ममता और अपनापन था। जिस तरह एक बच्चा अपनी माँ की बात नहीं टाल सकता, उसी तरह उस स्नेहपूर्ण आग्रह को ठुकराना संभव नहीं था।
भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान
1. सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों को पहचानो:
(क) कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी।
-> सरल वाक्य
(ख) माँजी बीमार है, इसलिए मैं नहीं गया।
-> संयुक्त वाक्य
(ग) मैं घूमकर पान की दुकान पर आ गया। -> सरल वाक्य
(घ) माँ ने कहा है कि आज तुरंत चले आना।
-> म्रिश्र वाक्य
(ङ) मैं भी पीछे था, किंतु स्त्री के मुँह से ‘बे…’ निकलकर रह गया।
-> संयुक्त वाक्य
2. मुहावरों का अर्थ एवं वाक्य प्रयोग:
नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना): पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
आँखें बदल जाना (व्यवहार बदल जाना/बेरुखी): मुसीबत आते ही दोस्तों की आँखें बदल गईं।
घड़ी समीप होना (मृत्यु निकट होना): बूढ़े पिता ने कहा, “अब मेरी घड़ी समीप है, सब मिलजुल कर रहना।”
दंग रह जाना (आश्चर्यचकित होना): छोटे जादूगर का निशाना देखकर लोग दंग रह गए।
श्रीगणेश होना (आरम्भ होना): आज हमारे नए विद्यालय के निर्माण कार्य का श्रीगणेश हुआ।
अपने पाँवों पर खड़ा होना (स्वावलंबी बनना): पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पाँवों पर खड़ा हो गया है।
अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना (अपना नुकसान स्वयं करना): अच्छी नौकरी छोड़कर उसने अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार ली।
3. लिंग परिवर्तन:
रस्सी – रस्सा
जादूगर – जादूगरनी
श्रीमान – श्रीमती
गुड़िया – गुड्डा
वर – वधु
स्त्री – पुरुष
नायक – नायिका
माली – मालिन
4. लिंग निर्धारण:
रुकावट – स्त्रीलिंग
हँसी – स्त्रीलिंग
शरबत – पुल्लिंग
वाणी – स्त्रीलिंग
भीड़ – स्त्रीलिंग
तिरस्कार – पुल्लिंग
निशाना – पुल्लिंग
झील – स्त्रीलिंग
5. वचन परिवर्तन:
खिलौना – खिलौने
आँख – आँखें
दुकान – दुकानें
छात्रा – छात्राएँ
बिल्ली – बिल्लियाँ
साधु – साधु (या साधुओं)
कहानी – कहानियाँ
शब्दार्थ एवं टिप्पणी
विनोद: परिहास, मन बहलावा
विषाद: दुःख, वेदना
अभाव: गरीबी, आर्थिक विपन्नता
तिरस्कार: अपमान, भर्त्सना
प्रगल्भता: निःसंकोच बात करने का भाव
आशा है कि ‘छोटा जादूगर’ पाठ के ये प्रश्न-उत्तर आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। यदि आपका कोई और प्रश्न हो, तो हमें कमेंट में जरूर पूछें।
